Monday, 3 September 2018

या खुदा / गुरप्रीत कौर

हाथों की अँगुलियों के छोर पर उकरी है
कोई गाथा
दिल की धड़कन में उठा है
कोई बवाल
फिर पैरों से सुनाई दी है
घुंघरुओं की आवाज़
कानों को सुन रहे हैं
नाचते हुए साज़
आंख में हो रहा है
कोई महा नृत्य

या खुदा
ये तेरे कौन नाटक का अध्याय है
या मेरी ज़िंदगी का कौन सा परिदृश्य  ....... !

                                                                                                  अनुवाद - दर्शन दरवेश 

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या खुदा / गुरप्रीत कौर

हाथों की अँगुलियों के छोर पर उकरी है कोई गाथा दिल की धड़कन में उठा है कोई बवाल फिर पैरों से सुनाई दी है घुंघरुओं की आवाज़ कानों को सुन...

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