Sunday, 17 December 2017

परमिंदर सोढ़ी की दो पंजाबी कविताएं / हिंदी अनुवाद - दर्शन दरवेश


परमिंदर सोढ़ी की दो पंजाबी कविताएं / हिंदी अनुवाद - दर्शन दरवेश
1.

पूरी दोपहर  निकल गई 

एक लड़की
मेरी तीन कविताएँ लेकर
भाग गई है
ये कोई अच्छी  बात तो ना हुई ना !

कहाँ ले गई होगी वो
मेरी बेबस कविताओं को
पूरी दोपहर  निकल गई मेरी
बस यही सोचते ...

मुझे शक है
उसने उनका चूरा बना दिया होगा
और उन परिन्दों को
डाल दिया होगा
जो इस बरस उतर दिशा को जाएँगे
फिर कभी वापिस ना लौटेंगे ...

हो सकता है
उसने मेरी इन कविताओं को
चुपके से अपने दोस्तों की
ख़ाली जेबों में डाल दिया हो ,
ख़तरा इस बात का है
कविताएँ दीवाली तक
चुप नहीं बैठने वाली हैं
वो तो कभी भी आतिशबाज़ी बन कर
दोस्तों को हैरान कर सकती हैं ...

होने को तो
ये भी हो सकता है
उसने इन कविताओं को
कहीं छुपा दिया हो
और अब भूल गई हो
मुझे डर है
बड़े सालों के बाद
उसे जब अचानक ये मिल जाएँगी
तो वह उनको
लतीफ़े समझ कर
अपने दोस्तों को सुना ने  बैठ जाएगी ...

होने को तो
और भी बहुत कुछ
हो सकता है ...

आप तो मेरे फ़िकर को
समझ सकते हो ना !

वह लड़की कहीं मिले
तो उसको कहना मत भूलना
कवि चले जाते हैं
पर
कविताएँ कभी कहीं नहीं जातीं
हमारे साथ चलती हैं
चुपी बन के कभी मुस्कराहट बन कर ...

कभी हवा बन के कभी रंग बन कर
कभी ये बन के कभी वो बन कर
कविताएँ कुछ भी बन सकती हैं
वो नहीं बनती
तो बस आँसु नहीं बनती ...

एक लड़की
मेरी तीन कविताएँ
ले कर कहाँ चले गई है ...

2.
तू ना भी मिलता 

तू ना भी होता
तो क्या होता ...

मैं पिछले मोड़ से
मुड़ जाता
खुले खेत में जा कर
ठहर जाता ,
कुछ देर ख़ालीपन को
हल्का हल्का छुह लेता,
मरे मित्र से बातें करता
फिर वापिस
Parminder Sodhi (Punjabi Writer)
शहर   को चल देता ...

तू ना भी होता
तो क्या होता ...
कुछ नज़्मों से चूक कर
मैं दिनचरय में खो जाता ,
दिल मेरा कुछ कम उड़ता
कुछ दिन मैं कम हँसता ,
रिमझिम मन को मत छूती
मैं थोड़ा भारी क़दमों से
फिर वापिस शहिर को चल देता ...

तू ना भी होता
तो क्या होता ...

मैं रात को थोड़ा सो लेता
सुबह की नीरसता को
अख़बारी ख़बरों से
मैला मैला धो लेता,
धकियाना आतुर दुनियाँ से
प्यार की ज़िद कम करता,
बस काम धाम में व्यस्त हो
आगे दूर कहीं निकल जाता ...

तू ना भी होता
तो क्या होता ...

1 comment:

  1. इन कविताओं को अनुदित करने में मज़ा आया है...

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