Saturday, 3 June 2017

VATTAR


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पंजाबी कविता / जोगन / विपन गिल / अनुवाद - दर्शन दरवेश

उसने कहा तुम कभी मत आना इन दर दरवाज़ों पर न जोगी बन न भोग विलासी बन जा किसी और दर पर जा और अपनी अलख जगा पर , मैं हूँ कि  .... हर व...

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