Wednesday, 15 July 2015

Lyrics by - Darshan Darvesh

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चिट्ठीयां / स्वर्णजीत सवी / अनुवाद - दर्शन दरवेश

चिट्ठीयां   / स्वर्णजीत सवी भोज पत्रों पर बैठकर ताबीज़ में बंद संदेशे कबूतरों के पाँव में बांधे उनकी लम्बी उडारी इंतज़ार करती आँखों क...

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